आजम खां के बहाने पश्चिमी यूपी साधने की कवायद में जुटे अखिलेश
रामपुर
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सांसद आजम खां के बहाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने की कवायद शुरू कर दी है। उनका आजम के घर रामपुर से साइकिल रैली का आगाज करना इसी सियासी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। बेशक, बदलते वक्त में आजम खां मुसीबतों में फंसे हुए हैं। सालभर से ज्यादा का वक्त हो गया, वह बेटे अब्दुल्ला के साथ सीतापुर की जेल में बंद हैं। बावजूद इसके आज भी वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी का बड़ा मुस्लिम चेहरा हैं। इसका पूर्व में वह एहसास भी करा चुके हैं। लोकसभा चुनाव में जब देशभर में भाजपा की लहर थी, उस वक्त आजम खां न सिर्फ खुद चुनाव जीते, बल्कि मंडल में संभल और मुरादाबाद लोकसभा सीट का चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में कराने में कामयाब रहे। विधानसभा चुनाव में भी आजम खां ने रामपुर जनपद की चार विधानसभा सीटों में से तीन रामपुर, स्वार, चमरौआ पर जीत दिलाने में सफलता हासिल की थी। विपरीत परिस्थितियों में जेल से ही उनका एक इशारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव की दिशा और दशा बदलने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि करीब सालभर से आजम प्रकरण में ढीली पड़ी सपा न सिर्फ सक्रिय हो गई है। बल्कि, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रामपुर से साइकिल रैली का आगाज कर दिया।
पूर्व में रामपुर में सोशल मीडिया पर आजम समर्थकों ने बकायदा मुहिम चलाई थी। इसमें आजम खां, उनके परिवार और जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ की गई तमाम कार्रवाई के बावजूद समाजवादी पार्टी और इसके शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर खूब खरी-खरी सुनाई गई थी। लिहाजा, अखिलेश यादव की आजम समर्थकों को साधना वक्त की नजाकत है।
सांसद आजम खां पर जब मुकदमों की शुरुआत की गई थी तब पार्टी ने आंदोलन का ऐलान किया था। प्रदेश भर के सपाइयों को रामपुर आना था, लेकिन शासन-प्रशासन की सख्ती के चलते आंदोलन नहीं हो पाया था। जिले भर में और दूसरे जनपदों में भी सपा नेताओं को रामपुर आने से रोका गया था।आजम खां के घर में ही अब्दुल्ला आजम के नेतृत्व में कुछ कार्यकर्ता एकत्र हुए, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और बाद में रिहा किया गया। सपा मुखिया अखिलेश यादव की साइकिल रैली को युवजनसभा और छात्रसभा के कार्यकर्ता लाइव दिखाते रहे। कोई साइकिल से तो कोई बाइक से फोन लेकर लाइव रहा। ऐसा रैली की शुरुआत से लेकर समापन तक किया गया। रैली के दौरान अफरा-तफरी भगदड़ का माहौल रहा। भागदौड़ में कई कार्यकर्ताओं के फोन भी गिर गए। किसी की चप्पल निकल गई तो किसी का जूता निकल गया।

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